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Saturday, June 18, 2011

क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ? :परग्रही जीवन श्रंखला भाग १

क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ?

महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो " src="http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/1/15/Giordano_Bruno.jpg/180px-Giordano_Bruno.jpg" alt="महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो " width="108" height="121">

महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो

आज से पांच सौ वर्ष ईसवी सन १६०० मे पहले एक विचारक, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ने यह प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न का उत्तर तो उस विचारक को नही मीला, उसे रोम की सड़को पर जिन्दा जला दिया गया था। इतना ही नही उसे जिन्दा जलाने से पहले उसे अपमानित करने के लिये सड़क के किनारे खम्बे पर नग्न कर उल्टा लटकाया गया था। कोपरनिकस की तरह वह भी मानता था कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। वह यह भी मानता था कि बाह्य अंतरिक्ष मे हमारे जैसे अनगिनत प्राणी निवास करते है। अंतरिक्ष मे अनगिनत संतो, करोड़ो पोप, अरबो चर्चो और एकाधिक जीसस की संभावनाओ को समाप्त करने का चर्च के पास सबसे आसान उपाय था, उस विचारक को जिन्दा जला देना।

उस महान विचारक गीआर्दनो ब्रुनो के साथ किया गया अमानविय व्यव्हार सैकड़ो वर्षो तक विज्ञान के इतिहासकारो की नींदे उड़ा देता रहा है। लेकिन आज ब्रुनो अपना बदला हरकुछ सप्ताह मे लेता है। महिने मे कम से कम दो बार अंतरिक्ष मे किसी तारे की परिक्रमा करते एक नये ग्रह की खोज हो रही है। २५० से ज्यादा अंतरिक्ष मे किसी अन्य तारे की परिक्रमा करते ग्रह खोजे जा चूके है। ब्रुनो की अंतरिक्ष मे सौर मंडल के बाहर ग्रहो की भविष्यवाणी सही साबित हो चूकी है।

लेकिन एक प्रश्न अभी भी है। मंदाकिनी आकाशगंगा मे तारो के ग्रह तो है लेकिन कितने ग्रह पर जीवन हो सकता है ? और यदि जीवन है कितने ग्रहो पर मानव के जैसे बुद्धिमान जीवन है ?

परग्रही जीवो से मुलाकात की कल्पना हमारे समाज , हमारे लेखको को रोमांचित करते रही है। अखबारो मे , टीवी मे अनजानी उड़नतश्तरीयो के दिखायी देने के समाचार आम है। बालीवुड से लेकर हालीवुड की फिल्मो ने परग्रही जीवो पृथ्वी पर आते दिखाया है, चाहे “इंडीपेन्डेंस डे” के आक्रांता परग्रही हो, ’एम आई बी’ के आंतकी परग्रही, ’इटी’ के दोस्ताना परग्रही या हिन्दी की ’कोई मील गया’ का जादू !

एच जी वेल्स के उपन्यास ’वार आफ दी वर्ल्डस’ मे पृथ्वी पर मंगल के निवासीओ का हमला दिखाया था। ३० अक्टूबर १९३८ को सीबीएस रेडीयो के अनाउंसर आर्सन वेल्लेस ने इस उपन्यास के कथानक पर हैलोवीन के अवसर पर मजाक बनाने का खुरापाती उपाय सोचा। उन्होने रेडीयो पर थोड़ी थोड़ी देर पर संगीत को रोक कर पृथ्वी पर मंगल वासीयो के हमले के समाचार देने शुरू कर दिये। हर समाचार बुलेटीन मे मानवो की हार और मानव सभ्यता के क्रमशः पतन के समाचार थे। यह एक मजाक था लेकिन पर ग्रही जीवन मे हमारा विश्वास इतना गहरा है कि लाखों अमरीकी यह सूनकर घबरा गये थे कि मंगल ग्रह की मशीने न्यु जर्सी की ग्रूवर मील मे उतर चूकी है और शहरो को बर्बाद करनेवाली किरणे छोड़ रही है साथ ही पूरे विश्व को अपने कब्जे मे ले रही है। समाचार पत्रो ने बाद मे खबर दी थी कि लाखो लोगो ने अपने घर खाली कर दिये थे और क्षेत्र छोड़ कर चले गये थे, कुछ प्रत्यक्षदर्शीयो ने जहरीली गैस महसूस की थी और दूरी पर चमकती रोशनी देखी थी।

मंगल ग्रह और मंगलवासीयो की खबरो मे एक बड़ा उछाल १९५० मे खगोलशाश्त्रीयो द्वारा मंगल एक बड़ा सैकड़ो मील चौड़े ’M’ के देखे जाने के बाद आया। कुछ लोगो के अनुसार यह पृथ्वी के लोगो के लिये मंगलवासीयो का संदेश था जिसमे ’M’ अंग्रेजी के ’Mars’ का पहला अक्षर था और जिस प्रकार खेलो के स्टेडीयम मे चीयरलीडर अपनी टीम के अक्षर बनाते है उसी तरह मंगलवासी यह अक्षर बना कर पृथ्वी के लिये संदेश भेज रहे थे। निराशात्मक सोच वाले लोगो के लिये यह ’Mars’ का ’M’ ना होकर ’War’ का ’W’ था और मंगलवासीयो की पृथ्वी वासीयो से युद्ध की घोषणा थी। कुछ दिनो बाद मंगल पर का यह ’M’ या ’W’ अपने आप मिट गया। यह पूरी संभावना है कि यह आकृती मंगल पर आये किसी विशाल धूल के तुफान ने बनायी थी जिसने पूरी मंगल की सतह को ढंक लिया था लेकिन चार ज्वालामुखी के शिखर इससे ढंक नही पाये थे। धूल के तुफान मे ये चारो शिखर ‘M’ की आकृती बना रहे थे।

परग्रही जीवन के अभी तक कई दावे किये गये है। इसका एक अप्रत्यक्ष तर्क हमारे देख पाने की क्षमता मे छाया असिमित विशालकाय ब्रम्हाण्ड है। इस तर्क के अनुसार इस असिमित विशालकाय ब्रम्हाण्ड मे पृथ्वी के बाहर जीवन ना का होना असंभव है, इसका समर्थन कार्ल सागन और स्टीफन हाकिंग जैसे वैज्ञानिक भी करते है।

एक संभावना यह भी है कि जीवन पूरे ब्रम्हाण्ड मे एकाधिक स्थानो पर स्वतंत्र रूप से पनपा होगा। दूसरी संभावना के अनुसार जीवन निवासयोग्य ग्रहो पर उल्काओ, धूमकेतुओ द्वारा फैलते गया होगा। यह दोनो संभावनाये एक साथ भी संभव है। परग्रही जीवन जैसे जीवाणु अंतरिक्ष मे सारे ब्रम्हांड मे फैले होने विश्वास को कार्ल सागन जैसे वैज्ञानिको ने मान्यता दी है। अभी तक इसका कोई नमुना नही मीला है लेकिन इसके कुछ विवादास्पद दावे जैसे एलन हिल्स ८४००१ उल्का भी मौजूद है।

परग्रही जीवन की संभावना(जहां या तो जीवन है या जीवन रहा होगा) वाले ज्ञात ग्रहो मे शुक्र, मंगल, बृहस्पति का चन्द्रमा युरोपा, शनि के चन्द्रमा टाईटन,एनक्लेडस और सौर बाह्य ग्रह जैसे ग्लीसे ५८१ सी,जी और डी शामील है।

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न्यु जर्सी स रा अमरीका मे ३१ जुलाई १९५२ को दिखायी दी उड़नतश्तरी का चित्र!

कुछ विश्वास जैसे परग्रही उड़नतश्तरीयां, परग्रहीयो द्वारा अपहरण के दावे अधिकतर वैज्ञानिको द्वारा संदेहास्पद माने गये है। उड़नतश्तरी या UFO(Unidentified Flying Object) एक आकाश मे दिखायी देने वाली एक ऐसी असामान्य वस्तु है जिसे निरिक्षक या जांचकर्ता किसी ज्ञात विमान या वस्तु या प्राकृतिक घटना से जोड़कर नही देख पाता है। सामान्यत: इसे परग्रही यान समझा जाता है लेकिन वैज्ञानिक इस दावे को अस्वीकार करते है। इतिहास मे भी उड़नतश्तरीयो को देखा गया है लेकिन आधुनिक काल मे इन पर ध्यान द्वितिय विश्वयुद्ध के पश्चात गया है जब विभिन्न राष्ट्रो की सरकारो ने इन घटनाओ की सैन्य दृष्टिकोण से जांच के आदेश दिये है। अधिकतर उड़नतश्तरी की घट्नाये अब तक यातो पृथ्वी के यान या ज्ञात खगोलिय पिंड या अपवाह पाये गये है।